Avadh Sanskriti, Bharat

Avadh Sanskarti Utkarsh Samti, Bharat

‘‘अवध की समृद्ध संस्कृति के भाषा, परंपरा, लोककला की आध्यात्मिक विरासत को संवर्धन, सरंक्षण और और प्रचार-प्रसार हेतु एक समाजिक संगठन।’’

हमारा विजन
‘‘अवध की समृद्ध संस्कृति के भाषा, परंपरा, लोककला की आध्यात्मिक
विरासत को संवर्धित, सरंक्षित एवं विश्वपटल पर स्थापित कर युवाओं
में राष्ट्रवोध, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना।’’

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हमारे कार्य

लोककला की आध्यात्मिक विरासत

अवध की समृद्ध संस्कृति के लोककला की आध्यात्मिक विरासत को सरंक्षित एवं विश्वपटल पर स्थापित कर युवाओं में सांस्कृतिक चेतना का विकास करना।

गुरु गोरखनाथ अवधी भाषा शोध संस्थान

अवधी भाषा शोध संस्थान अवधी भाषा, साहित्य, लोकसंस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कार्य करने वाला संस्थान है। यह शोध, प्रकाशन, संगोष्ठी, प्रशिक्षण और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से अवधी भाषा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने का कार्य करता है।

डिजिटल एजुकेशन, लाइब्रेरी एवं विश्वविद्यालय

यह मंच आधुनिक शिक्षा, शोध और ज्ञान के प्रसार हेतु समर्पित है। यहाँ विद्यार्थियों को डिजिटल पुस्तकालय, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, शोध संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। हमारा उद्देश्य तकनीक के माध्यम से शिक्षा को सरल, सुलभ और सभी के लिए उपयोगी बनाना है।

अवध संस्कृति से जुड़ें , संस्कृति को आगे बढ़ाएं

आइये हम सब मिलकर अपनी
संस्कृति, परम्परा और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुचाएं

सन्देश

:"अवधी भाषा के साहित्यक महत्व को पुर्नजीवित ,वं भारतीय संस्कृति के आधुनिक स्वरूप को अवधी भाषा के प्रचीन संयोजनो के माध्यम से सुदृढ़ एवं सुगंठित करने का प्रयास निश्चित ही प्रशंसनीय है। अवधी भाषा को क्षेत्रीय बोली के स्तर से उन्नयति करने के गुरु गोरखनाथ जी के भागीरथी प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही अवधी काव्य का प्रार्दुभाव ‘गुरुवाणी’ के रूप में हो सका। सामान्य जीवन के अन्तःमन में सांस्कृतिक सौम्यता, सद्भाव एवं समरस जीवन शैली के अन्य विशिष्ट सोपानों को निर्मित करनें की महत्व पूर्ण भूमिका निभाई है। मैं अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति, भारत को साधुवाद देता हूँ कि वह अवध संस्कृति के संरक्षित एवं सर्वधन की यात्रा निरंतर चली रहें।

सन्देश

अवधी भाषा के साहित्यक महत्व को पुर्नजीवित ,वं भारतीय संस्कृति के आधुनिक स्वरूप को अवधी भाषा के प्रचीन संयोजनो के माध्यम से सुदृढ़ एवं सुगंठित करने का प्रयास निश्चित ही प्रशंसनीय है। अवधी भाषा को क्षेत्रीय बोली के स्तर से उन्नयति करने के गुरु गोरखनाथ जी के भागीरथी प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही अवधी काव्य का प्रार्दुभाव ‘गुरुवाणी’ के रूप में हो सका। सामान्य जीवन के अन्तःमन में सांस्कृतिक सौम्यता, सद्भाव एवं समरस जीवन शैली के अन्य विशिष्ट सोपानों को निर्मित करनें की महत्व पूर्ण भूमिका निभाई है। मैं अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति, भारत को साधुवाद देता हूँ कि वह अवध संस्कृति के संरक्षित एवं सर्वधन की यात्रा निरंतर चली रहें।

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ताजा संचार और अपडेट

संस्था द्व्रारा हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम का विवरण

सेमिनार 2025, जिला पंचायत सभागार , गोण्डा ​

डॉ रमेश पोखरियाल " निशंक " जी को संगठन से अवगत कराया गया

राष्टीय प्रवक्ता जितेंद्र शुक्ल " कवि विशाल" ने शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल " निशंक " जी को संगठन के बारे में अवगत कराया

संस्था के प्रदेश अध्यक्ष श्री वासुदेव मिश्रा ने सम्मान प्राप्त किया

संस्था के प्रदेश अध्यक्ष Vasudev Mishra ने प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री Ramesh Pokhriyal Nishank से सम्मान प्राप्त किया। यह सम्मान संस्था के सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान के लिए प्रदान किया गया, जो संगठन के कार्यों और उपलब्धियों का गौरवपूर्ण प्रतीक है

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