‘‘अवध की समृद्ध संस्कृति के भाषा, परंपरा, लोककला की आध्यात्मिक
विरासत को संवर्धित, सरंक्षित एवं विश्वपटल पर स्थापित कर युवाओं
में राष्ट्रवोध, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना।’’
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हमारे कार्य
अवध संस्कृति से जुड़ें , संस्कृति को आगे बढ़ाएं
आइये हम सब मिलकर अपनी
संस्कृति, परम्परा और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुचाएं
सन्देश
:"अवधी भाषा के साहित्यक महत्व को पुर्नजीवित ,वं भारतीय संस्कृति के आधुनिक स्वरूप को अवधी भाषा के प्रचीन संयोजनो के माध्यम से सुदृढ़ एवं सुगंठित करने का प्रयास निश्चित ही प्रशंसनीय है। अवधी भाषा को क्षेत्रीय बोली के स्तर से उन्नयति करने के गुरु गोरखनाथ जी के भागीरथी प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही अवधी काव्य का प्रार्दुभाव ‘गुरुवाणी’ के रूप में हो सका। सामान्य जीवन के अन्तःमन में सांस्कृतिक सौम्यता, सद्भाव एवं समरस जीवन शैली के अन्य विशिष्ट सोपानों को निर्मित करनें की महत्व पूर्ण भूमिका निभाई है। मैं अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति, भारत को साधुवाद देता हूँ कि वह अवध संस्कृति के संरक्षित एवं सर्वधन की यात्रा निरंतर चली रहें।
सन्देश
अवधी भाषा के साहित्यक महत्व को पुर्नजीवित ,वं भारतीय संस्कृति के आधुनिक स्वरूप को अवधी भाषा के प्रचीन संयोजनो के माध्यम से सुदृढ़ एवं सुगंठित करने का प्रयास निश्चित ही प्रशंसनीय है। अवधी भाषा को क्षेत्रीय बोली के स्तर से उन्नयति करने के गुरु गोरखनाथ जी के भागीरथी प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही अवधी काव्य का प्रार्दुभाव ‘गुरुवाणी’ के रूप में हो सका। सामान्य जीवन के अन्तःमन में सांस्कृतिक सौम्यता, सद्भाव एवं समरस जीवन शैली के अन्य विशिष्ट सोपानों को निर्मित करनें की महत्व पूर्ण भूमिका निभाई है। मैं अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति, भारत को साधुवाद देता हूँ कि वह अवध संस्कृति के संरक्षित एवं सर्वधन की यात्रा निरंतर चली रहें।










